करिश्मा कपूर ने ताजा कीं RK Studio की गणेश चतुर्थी की यादें: बोलीं- ‘दादाजी राज कपूर के जाने के बाद बंद हो गई वो खास परंपरा’

मुंबई में गणेश चतुर्थी का त्योहार हमेशा से ही बेहद खास रहा है, लेकिन हिंदी सिनेमा के सबसे बड़े और प्रतिष्ठित परिवार यानी ‘कपूर खानदान’ का गणेश उत्सव एक जमाने में पूरी फिल्म इंडस्ट्री के लिए आकर्षण का सबसे बड़ा केंद्र हुआ करता था। चेंबूर स्थित मशहूर आरके स्टूडियो (RK Studio) में बप्पा का स्वागत जिस भव्यता और सादगी के संगम के साथ किया जाता था, उसकी मिसाल आज भी दी जाती है।

हाल ही में गणेश चतुर्थी के पावन अवसर पर अभिनेत्री करिश्मा कपूर (Karisma Kapoor) ने अपने बचपन के उन सुनहरे दिनों को याद किया। उन्होंने एक भावुक इंटरव्यू में खुलासा किया कि उनके दादाजी और भारतीय सिनेमा के ‘शोमैन’ राज कपूर (Raj Kapoor) के दौर में आरके स्टूडियो का गणेश उत्सव कितना भव्य होता था और उनके जाने के बाद यह परंपरा क्यों हमेशा के लिए थम गई।

करिश्मा कपूर ने बताया कि आरके स्टूडियो में बप्पा की स्थापना की शुरुआत खुद राज कपूर ने की थी। यह केवल परिवार का त्योहार नहीं था, बल्कि स्टूडियो के हर एक स्पॉटबॉय, टेक्नीशियन, कैमरामैन से लेकर बॉलीवुड के दिग्गज सितारों तक का साझा जश्न हुआ करता था:

  • दादाजी की गैरमौजूदगी में सूना हुआ आंगन: करिश्मा ने साझा किया, “आरके स्टूडियो की गणेश चतुर्थी हम बच्चों के लिए साल का सबसे बड़ा दिन होती थी। लेकिन 1988 में जब दादाजी (राज कपूर) हमें छोड़कर चले गए, तो उसके बाद वह परंपरा आगे नहीं बढ़ सकी और स्टूडियो में बप्पा का आगमन हमेशा के लिए बंद हो गया। दादाजी के बिना उस जगह की रूह जैसे चली गई थी।”

  • कपूर भाइयों की परंपरा: राज कपूर के बाद उनके बेटों—रणधीर कपूर, ऋषि कपूर और राजीव कपूर ने कुछ सालों तक त्योहार की गरिमा को संभाला, लेकिन समय के साथ और परिवार के बिखरते दायरों के बीच स्टूडियो में सार्वजनिक रूप से बप्पा की स्थापना का दौर समाप्त हो गया।

करिश्मा कपूर ने अपने बचपन की यादें ताजा करते हुए बताया कि आरके स्टूडियो के गणेश उत्सव का विसर्जन जुलूस मुंबई की सड़कों पर देखने लायक होता था:

  • सड़कों पर उतरता था पूरा कपूर खानदान: विसर्जन के दिन चेंबूर से लेकर समुद्र तट तक निकलने वाले जुलूस में रणधीर कपूर, ऋषि कपूर और राजीव कपूर खुद नंगे पांव ढोल-ताशों की थाप पर गुलाल उड़ाते हुए नाचते चलते थे।

  • बिना किसी वीआईपी कल्चर के खुला रहता था स्टूडियो: उत्सव के दिनों में आरके स्टूडियो के दरवाजे आम जनता के लिए खुले रहते थे। कोई भी आम नागरिक अंदर आकर बप्पा के दर्शन कर सकता था और कपूर परिवार द्वारा बांटे जाने वाले मोदक और प्रसाद को ग्रहण कर सकता था।

साल 2017 में आरके स्टूडियो में लगी भीषण आग और उसके बाद 2019 में इस ऐतिहासिक स्टूडियो की जमीन के बिक जाने के बाद यह परंपरा पूरी तरह इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गई। करिश्मा ने बताया कि भले ही अब आरके स्टूडियो नहीं रहा, लेकिन कपूर परिवार की हर पीढ़ी ने इस आस्था को जीवित रखा है:

  • अब रणधीर कपूर, बबीता कपूर, करिश्मा कपूर और करीना कपूर अपने-अपने घरों में बेहद निजी और पारिवारिक माहौल में इको-फ्रेंडली गणपति बप्पा की स्थापना करते हैं।

  • करिश्मा के अनुसार, हर साल जब भी वह बप्पा की आरती करती हैं, तो उन्हें अपने दादाजी राज कपूर का चेहरा और आरके स्टूडियो की वह गूंज आज भी साफ महसूस होती है।

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