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टी.बी. के उन्मूलन में निजी स्वास्थ्य प्रदाताओं का भी सहयोग प्राप्त किया जाय: सिद्धार्थ नाथ सिंह

लखनऊ: प्रदेश के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह ने राष्ट्रीय क्षय नियंत्रण कार्यक्रम की प्रगति पर संतोष व्यक्त करते हुए लक्ष्य के अनुरूप और अधिक प्रयास करने की आवश्यकता पर बल दिया। निःक्षय पोषण योजना के अन्र्तगत न्यूट्रीशियन सपोर्ट हेतु डी0बी0टी0 से 500 रूपये प्रति माह की दर से लगभग 21000 क्षय रोगियो के बैंक खाते में 30 अक्टूबर 2018 तक 2.01 करोड़ रूपये का भुगतान पर संतोष व्यक्त किया। उन्होंने राज्य क्षय नियंत्रण कार्यक्रम अधिकारी को निर्देशित किया कि माह अप्रैल 2018 से पंजीकृत एवं उपचार प्राप्त कर रहे क्षय रोगियों को डी0बी0टी0 के माध्यम से शत प्रतिशत भुगतान सुनिश्चित किया जाय।

श्री सिंह ने आज इन्दिरा गांधी प्रतिष्ठान में टी.बी. के उन्मूलन हेतु ‘जीत प्रोजेक्ट’ का शुभारम्भ किया। उन्होंने कार्यक्रम को सफल बनाने हेतु जन भागीदारी बढ़ाने पर बल दिया। उन्होंने जीत कार्यक्रम की सफलता के लिए हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए कार्यक्रम के साथ जुडे समस्त कर्मचारियांेें, अधिकारियों, चिकित्सकों के अच्छे कार्य की सराहना भी की। उन्होंने बताया कि भारत विश्व का दूसरा सबसे अधिक आबादी वाला देश है। विश्व के कुल टी.बी. रोगियो का लगभग 25 प्रतिशत रोगी भारत में है। भारत के 20 प्रतिशत मरीज उत्तर प्रदेश राज्य में है। सार्वजनिक क्षेत्र वर्तमान में अनुमानतः मात्र 50 प्रतिशत टी0बी0 के मरीजो का इलाज कर रहा हैं शेष 50 प्रतिशत निजी क्षेत्र के स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं के यहाॅ उपचार प्राप्त कर रहे है। पुनरीक्षित राष्ट्रीय क्षय नियंत्रण कार्यक्रम में टी.बी. के नियंत्रण हेतु निजी स्वास्थ्य प्रदाताओं के महत्व को समझा हैं। आर्थिक रूप से सम्पन्न समुदाय द्वारा सम्पूर्ण परिदृश्य में टी.बी. इलाज हेतु निजी क्षेत्र को वरीयता दी जाती है। भारत सरकार के निर्देशानुसार “जीत“ कार्यक्रम (च्तवरमबज श्रम्म्ज्) का उदद्ेश्य पुनरीक्षित राष्ट्रीय क्षय नियंत्रण कार्यक्रम के सहयोग से निजी क्षेत्र के चिकित्सकों को कार्यक्रम में उपलब्ध सेवाओ (ब्ठछ।।ज् टेस्ट) गुणवत्तापूर्वक जाँच एवं उपचार सेवाओं की पहुँच को प्रत्येक जनमानस तक उपलब्ध कराना है।

पाथ प्रोजेक्ट के कन्ट्री हेड श्री नीरज जैन ने बताया कि जीत प्रोजेक्ट 60 जिलों में कार्य कर रहा है, जिसमें 15 जिले च्च्ै। (प्राईवेट प्रोवाइडर सपोर्ट एजेन्सी) के तथा 45 च्च्ै। स्पजम के हैं। जिनका मुख्य उद्देश्य निजी क्षेत्र को टी.बी. उन्मूलन के लिए अपनी भागीदारी देने हेतु प्रेरित करना, विभिन्न हित धारकों को ‘जीत प्रोजेक्ट‘ में सहयोग करने के लिए प्रेरित करना, निजी स्वास्थ्य सेवा प्रादाताओं एवं इंडियन मेडिकल एसोसियेशन को जीत प्रोजेक्ट के सहयोग हेतु संगठित करना, जीत प्रोजेक्ट पुनरीक्षित राष्ट्रीय क्षय नियंत्रण कार्यक्रम के मार्गदर्शन से निजी क्षेत्र के योगदान को स्थायित्व देने के लिए कटिबद्ध है। जीत प्रोजेक्ट का उद्देश्य पुनरीक्षित राष्ट्रीय क्षय नियंत्रण कार्यक्रम के अन्र्तगत प्रयोग होने वाले लाजिस्टिक, औषधियो, एवं प्राइवेट सेक्टर के चिकित्सकों को पुनरीक्षित राष्ट्रीय क्षय नियंत्रण कार्यक्रम में संदिग्ध क्षय रोगियो को चिन्हित करके समस्त सेवा प्रदान करता है। जीत कार्यक्रम का लक्ष्य टी.बी. उन्मूलन हेतु कार्यक्रम को सहयोग करना है।

राज्य क्षय नियंत्रण कार्यक्रम अधिकारी डा. संतोष गुप्ता ने बताया कि प्रदेश में स्थापित एवं क्रियाशील 141 सी0बी0एन0ए0ए0टी0 मशीन द्वारा प्रत्येक माह लगभग 30,000 क्षय रोगियों की निःशुल्क जांच की जा रही है। प्रदेश में सी0बी0एन0ए0ए0टी0 से प्रतिमाह 30000 जांच हो रही है माह अप्रैल 2018 से सितम्बर 2018 के मध्य सी0बी0एन0ए0ए0टी0 जांच में 41 प्रतिशत की वृद्धि पायी गयी है। जनवरी 2018 से प्रदेश में लगभग 3,27,998 टी0बी0 केस चिन्हित किये गये है जिसमें लगभग 87,809 निजी क्षेत्र में चिन्हित किये गये है। वित्तीय वर्ष 2018-19 में प्रदेश के समस्त जनपदों में एक्टिव केस फाइडिंग कैम्पेन के द्वारा लगभग 14000 टीबी के मरीज खोजे गये और जिनका उपचार कराया जा रहा है। डा0 भारती द्वारा जीत प्रोजेक्ट की संरचना एवं कार्य प्रणाली पर विस्तार पूर्वक चर्चा की गयी।

कार्यक्रम में सचिव, चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, श्रीमती वी0 हेकाली झिमोमी, मिशन निदेशक, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, श्री पंकज कुमार, महानिदेशक, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य, डा0 पदमाकर सिंह, निदेशक (प्रशासन), चिकित्सा एवं स्वास्थ्य डा0 पूजा पाण्डेय, निदेशक राष्ट्रीय कार्यक्रम, डा0 ई0यू0 सिद्दीकी सहित स्वास्थ्य विभाग के अन्य अधिकारीगण उपस्थित थे।

 

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