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पाक्सो एक्ट के अन्तर्गत स्पेशल टास्क फोर्स के गठन एवं समुचित कार्यवाही के निर्देश

लखनऊ: श्री ओ0पी0 सिंह, पुलिस महानिदेशक, उ0प्र0 द्वारा रिट पिटीशन(सी) संख्या-76/ 2018 आलोक श्रीवास्तव बनाम यूनियन आॅफ इण्डिया व अन्य में मा0 सर्वोच्च न्यायालय के पारित आदेश के क्रम में बालिकाओं के साथ घटित दुष्कर्म/हत्या की घटनाओं की विवेचना एवं वादों की पैरवी के हेतु राजपत्रित अधिकारी के नेतृत्व में स्पेशल टास्क फोर्स का गठन किये जाने के निर्देश दिये गये।

  • समस्त जनपदों में पाक्सो एक्ट का विचारण करने वाले विशेष न्यायालय में प्रभावी पैरवी व अनुश्रवण हेतु प्रत्येक जनपद के अपर पुलिस अधीक्षक अपराध (जहां अपर पुलिस अधीक्षक अपराध का पद नहीं है वहां राजपत्रित अधिकारी) के नेतृत्व में एक स्पेशल टास्ॅक फोर्स का गठन किया जाये जो पाक्सो एक्ट की विवेचना, अभियोजन एवं विचारण के सम्बन्ध में अनवरत् अनुश्रवण करायेगा।
  • जोन स्तर पर जोनल अपर पुलिस महानिदेशक के स्टाफ आफिसर अपने जोन के जनपदों की सूचना संकलित करके अपनी समीक्षात्मक टिप्पणी सहित अपने जोनल अधिकारी के समक्ष समीक्षा हेतु प्रस्तुत करेंगे तथा इस सम्बन्ध में अपने पास सदैव सम्बन्धित विवरण रखेंगे। जोनल स्टाफ आफिसर द्वारा इस प्रकार के प्रकरणों का नियमित रूप से अनुश्रवण किया जायेगा। जोनल अपर पुलिस महानिदेशक द्वारा अपने जोन के परिक्षेत्रीय पुलिस महानिरीक्षक/उपमहानिरीक्षक एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक/पुलिस अधीक्षकों को इसके व्यापक अनुपालन हेतु समय-समय पर प्रभावी निर्देश दियेे जायेंगे।
  • अपर पुलिस महानिदेशक अपराध, उ0प्र0 द्वारा मुख्यालय स्तर पर सभी जोन द्वारा की गई कार्यवाही संबंधी सूचनायें/विवरण प्राप्त कर गहन समीक्षा की जायेगी।
  • पीड़िता का बयान महिला पुलिस अधिकारी या महिला अधिकारी द्वारा अंकित किया जाये (धारा 161 द0प्र0सं0 के अन्तर्गत)। पाक्सो एक्ट के अन्तर्गत यह बयान यथासंभव उपनिरीक्षक स्तर की महिला पुलिस अधिकारी द्वारा अंकित किया जाये।
  • पीड़िता का मेडिकल परीक्षण धारा 164ए द0प्र0सं0 के प्रावधानों के अन्तर्गत कराया जाये। इसमें चिकित्सक द्वारा डी0एन0ए0 प्रोफाइलिंग हेतु आवश्यक मैटीरियल कलेक्शन भी सुनिश्चित करा लिया जाये (धारा 27 पाक्सो एक्ट)।
  • बलात्कार की घटनाओं के आरोपी का मेडिकल परीक्षण धारा 53 ए द0प्र0सं0 के अन्तर्गत करा लिया जाये और यह सुनिश्चित किया जाये कि चिकित्सक द्वारा डी0एन0ए0 प्रोफाईलिंग हेतु आवश्यक मैटेरियल संकलन कर लिया गया है।
  • क्रिमनल लाॅ एमेन्डमेंट आर्डिनेन्स-2018 के अनुसार बलात्कार संबंधी प्रकरणों में 02 माह में विवेचना अवश्य निस्तारित कर ली जाये।
  • पाक्सो एक्ट के अन्तर्गत पीड़िता का साक्ष्य मा0 विशेष न्यायालय द्वारा अपराध का संज्ञान लिये जाने के 30 दिन के अंदर अभिलिखित कराना सुनिश्चित किया जाये।
  • विवेचना में समस्त साक्षियों का मोबाइल नंबर अवश्य प्राप्त कर लिया जाये तथा उनके पते भी आधार कार्ड एवं अन्य प्रमाणिक दस्तावेजों से तस्दीक कर लिया जाये जिससे भविष्य में अभियोजन के समय गवाहों के परीक्षण में असुविधा न होने पाये। यथासंभव आधार कार्ड का विवरण भी अंकित किया जाये।
  • पाक्सो एक्ट तथा बलात्कार संबंधी अभियोगों की विवेचना गुणवत्तापूर्वक एवं निष्पक्षता से सुनिश्चित की जाये जिससे पीड़िता को न्याय मिल सके।

मा0 सर्वोच्च न्यायालय द्वारा क्रिमि0 अपील संख्या 1485/2008 गुजरात राज्य बनाम किशन भाई आदि में पारित आदेश दिनांक 7.1.2014 में आपराधिक प्रकरणों की विवेचना एवं अभियोजन कार्यो में गुणवत्ता की कमी पर चिंता व्यक्त करते हुए क्रिमि0 अपील संख्या 169/2014 में स्पष्ट निर्देश दिये हैं जिसके क्रम में शासनादेश संख्या जी0आई0-26/छः-पु0-9-14 -31(36)/2014 दिनांक 22.04.2014 एवं शासनादेश संख्या 1909/छः-9-2015-31(36)/2014 दिनांक 05.08.2015 द्वारा सर्वसम्बन्धित को दिशा निर्देश निर्गत किये गये हैं। अतः ऐसे गंभीर प्रकरणों में आरोप पत्र का विधिक परीक्षण अवश्य करा लिया जाये।

  • उ0प्र0शासन द्वारा निर्गत पीड़िता को उ0प्र0पीड़ित क्षतिपूर्ति योजना तथा उ0प्र0रानी लक्ष्मीबाई महिला सम्मान कोष नियमावली 2015 में निहित प्रावधानों के अन्तर्गत क्षतिपूर्ति की धनराशि आदि समय से प्रदान कराये जाने के सम्बन्ध में भी प्रभावी कार्यवाही सुनिश्चित करायी जाये।
  • स्पेशल टाॅस्क फोर्स का यह भी उत्तरदायित्व होगा कि आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल करने के उपरान्त विचारण प्रक्रिया शीघ्र प्रारंभ हो जाये और दिन-प्रतिदिन के आधार पर सभी साक्षियों की गवाही प्राथमिकता के आधार पर सुनिश्चित करा ली जाये।
  • पाक्सो एक्ट के अन्तर्गत विचारण के दौरान आवश्यक साक्ष्य प्रदर्शो का परीक्षण भी निर्धारित समय अवधि के अन्तर्गत अवश्य करा लिया जाये।
  • ट्रायल के समय पर 12 साल के नीचे की बच्चियों की घटना, बलात्कार एवं हत्या के प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए प्रभावी पर्यवेक्षण किया जाये।
  • ऐसे प्रकरणों में जहां विवेचना से सम्बन्धित पुलिस अधिकारी कहीं अन्यत्र स्थानान्तरित हो जाते हैं तो सम्बन्धित वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक/पुलिस अधीक्षक उन्हें साक्ष्य आदि हेतु बुलाये जाने पर तत्काल बिना किसी टाल-मटोल के नियत तिथि पर प्रत्येक दशा में भेजना सुनिश्चित करें जिससे अभियोजन/विचारण की प्रक्रिया में विलम्ब न हो।
  • इस सम्बन्ध में यदि कोई व्यवहारिक कठिनाई आती है तो मानीटरिंग सेल की मासिक बैठक में इस प्रकरण को रखकर आवश्यक विचार विमर्श करते हुए इसका त्वरित निराकरण करा लिया जाये।
  • स्पेशल टास्क फोर्स द्वारा पाक्सो एक्ट की विवेचना, अभियोजन एवं विचारण के सम्बन्ध में अनवरत् अनुश्रवण करायेगा।

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